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HINDI :: Stories :: Ittifaq se-1 :: ::

के ... मार दे ... ऊह्ह्ह्ह्ह ... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ... राजा ... बस ...बस ... निकल गया मेरा तो... बस कर।"

उसने अब मेरी गोल गोल गाण्ड थपथपाई और मुझे खड़ी कर दिया। मेरी गाण्ड पर से मिट्टी साफ़ की और मेरे दोनों पट चीर दिये।

उफ़्फ़्फ़ ... मेरे चूतड़ों की दरार अलग अलग हो गई ... मुझसे बिना पूछे ही उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड टिका दिया।

"मस्त गाण्ड है... कितनी नरम है !"

उसका सुपाड़ा छेद में फ़क से घुस गया। उसने बेदर्दी से मेरी गाण्ड का कीमा बनाना चालू कर दिया। पर मुझे तो वो मस्ती की खान लगने लगी थी। तभी एक जोड़ा वहाँ से चुदाई के मूड में गुजरा। हमें गाण्ड मराते देख कर वो रुक गया। पर समीर नहीं रुका। उसने मेरी गाण्ड मारना जारी रखा। मैंने भी उसे घूर कर देखा। वो दोनों मुस्काए ... सभ्य लोग थे वो ... हमें हाथ हिलाया और चुदाई के लिये आगे दूसरी झाड़ी तलाशने लगे।

उसकी जोरदार गाण्ड चुदाई से मेरी चूत फिर से गरमाने लगी। तभी उसके लण्ड ने ढेर सारा माल उगल दिया।

"हूँ... मेरी गाण्ड चोदने के लिये किसने कहा था।"

"किसी ने नहीं..."

"फिर मेरी गाण्ड मुझसे बिना इज़ाज़त लिये कैसे चोद दी?"

"तुम इतनी जल्दी पट गई थी और चुदवाने के लिये राजी हो गई थी कि मैंने सोचा लगे हाथ तुम्हारी गाण्ड भी बजा ही दूँ !"

"अब मेरी चूत में जोर की खुजली चल रही है वो ... उसका क्या करूँ?"

"यहाँ बैठो ..."

वो मुझे नीचे बैठा कर मेरी चूत को चूसने लगा। फिर चूत में अपनी दो

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